
बात कुछ साल पहले की है जब मैं ट्रैन से मुंबई का सफर कर रहा था। कोटा से एक अंकल मेरे सामने वाली सीट पर आ कर बैठे। सर्दियों के दिन थे। जल्द ही अँधेरा छाने लगा था।
कुछ ही समय में मैंने गौर किया की सामने बैठे अंकल फोन के टार्च से अपने टिकट को लगभग 10–12 बार पढ चुके थे। मैंने युं ही उत्सुकता-वश पूछ लिया कि अंकल इस टिकट में ऎसा क्या लिखा है कि इसे आप बार-बार बंद करके अंदर रख कर, बाहर निकाल कर पढ रहे हैं।
अंकल शायद इसी इंतेजार में थे कि कोई उनसे पूछे कि वो टिकट में क्या पढ रहे हैं, जबकि टिकट तो पूरा इंग्लिश में था ।
अंकल ने तुरंत बताया कि बेटे — “मैं इस टिकट में ये देख रहा हुं कि टिकट में ऎसा क्या लिखा है, जिससे ये पूरी एक सीट आज की यात्रा के दौरान मेरी हो जाएगी”
अंकल का जवाब सुनकर मैं थोङा सा मुस्कुराया और अंकल की ओर देखने लगा ।
फिर अंकल ने अपने दिल की खुशी और अपने मन में चल रही सारी कहानी एक फ्लो में कह डाली और मैं एक सुध में अकंल की सारी कहानी सुनता रहा ।
अंकल के चेहरे पर खुशी इस बात की थी कि ये टिकट उनके बेटे ने रिजर्व किया था जो शहर से बाहर रहता है और उसका प्रिंट इनके भतीजे ने निकलवा कर दिया था।
पूरे जीवन ट्रेन यात्रा के दौरान जनरल भीङ का नजारा लिया और आज ट्रेन में पूरी एक सीट मिल गयी थी, वो भी थर्ड-एसी वाले डिब्बे में।
उस वक्त अंकल के अंदर के भाव चिल्ला- चिल्ला कर दुनिया को बता देना चाहते थे कि इस टिकट में क्या लिखा था और उनके बेटे ने उनके आराम के लिये जनरल में धक्के खाते सफर से बचाने के लिये ट्रेन में थर्ड-एसी वाले डिब्बे का टिकट बुक किया था।
वाकयी खुशियां अनमोल होती हैं और खुश होने के लिये बहुत बङे कारण मिलने की जरुरत भी नहीं है।जब भी मौका मिले धीरे से मुस्कुरा लें ,क्योंकि इसका मोल अनमोल है।
ये सब देख सुन कर मैं वहीं बैठे-बैठे सभी देखता रहा और अंकल एक बार फिर अपने जिओ वाले फोन की टार्च से टिकट को पढने लगे।
और “इंतेजार” करने लगे स्टेशन के आने का, अपने बेटे से मिलने का … आज रात उन्हें नींद कहां आने वाली थी…!!!
PhD · e-Governance Specialist · Hindi Fiction Writer · Oracle & Python Expert
“Basically a Techie and a learner by heart — who still loves to learn new technologies, and finds in stories the truths that code cannot hold.”

