जूठे बरतनों के ढेर से घबराकर एक भारतीय पत्नी बुदबुदाते हुए बोली- “हे ईश्वर! यह अलादिन का जादुई चिराग हमेशा पुरुषों को ही क्यूं मिलता है……..महिलाओं को क्यों नहीं मिलता”?
“ये तुम्हारा कैसा अत्याचार है महिलाओं के प्रति….”
“आज अगर मेरे पास भी कोई अल्लादीन जैसा जिन्न होता तो वो हर दिन मेरा हाथ बंटा देता..”
“और मेरे हर काम आसान कर देता।”
“तुम भी न…बहुत अनर्थ करते हो भगवन!”…
महिला की इस मासूम पुकार को सुन भगवान द्रवित होकर स्वयं प्रकट हुए और बोले, – “हे पुत्री….हमारे नियम के अनुसार एक महिला को एक बार में सिर्फ एक ही जिन्न मिल सकता है…..”
“और हमारे रिकॉर्ड के अनुसार तुम्हारी शादी चौदह साल पहले ही हो चुकी है”
“और तुम्हें तुम्हारा जिन्न तो पहले ही मिल चुका है….”
“जिसे अभी-अभी तुमने सब्जी मार्केट भेजा है, … रास्ते में रश्मि टेलर से तुम्हारा सिला हुआ सूट लेते हुए, … गुप्ता किराने से बटर और फिर कछुआ छाप मच्छर अगरबत्ती खरीद कर….याद से तुम्हारे लिये राकेश मेडिकल से झंडू बाम ले उसे जेब में रखकर वो ऑफिस जायेगा….”
“और ऑफिस से लौटते समय शाम को तुम्हारे लिए गरम समोसे भी लाएगा..!!!”
“पुत्री तुम्हारा जिन्न भले ही थोड़ा टाइम खाऊ है, मगर चिराग वाले जिन्न से पक्का ज्यादा टिकाऊ है”