June 2024

Story – माँ का आशीर्वाद

दुकान बंद करने का समय हो आया था। तभी दो औरतें और आ गईं। “भैया साड़ियां दिखा देना कॉटन की, चुनरी प्रिंट में” आज मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। आज पाँच महीने हो गए हैं, अपनी ये छोटी सी दुकान खोले। आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। आज सुबह से दस पंद्रह कस्टमर […]

Story – सम्मान

ट्रेन से उतरकर मैने और दादी ने गाँव की बस पकड़ी। बस भी गाँव के अंदर तक कहाँ जाती थी, गांव तक पक्की सड़क ना होने के कारण हम दोनो को गाँव से करीब छ: किलोमीटर की दूरी पर ही उतार दिया। सड़क के किनारे बिसना बैल गाड़ी लिये खड़ा हुआ था।उसने दादी के पैर

Story – हमारे कर्म

चार महीने बीत चुके थे, बल्कि 10 दिन ऊपर हो गए थे, किंतु बड़े भइया की ओर से अभी तक कोई ख़बर नहीं आई थी कि वह पापा को लेने कब आएंगे. यह कोई पहली बार नहीं था कि बड़े भइया ने ऐसा किया हो. हर बार उनका ऐसा ही रवैया रहता है. जब भी

Story – नींद की गोलियाँ

नींद की गोलियों की आदी हो चुकी बूढ़ी माँ, नींद की गोली के लिए ज़िद कर रही थी। बेटे की कुछ समय पहले शादी हुई थी। बहु डॉक्टर थी। बहु सास को नींद की दवा की लत के नुक्सान के बारे में बताते हुए उन्हें गोली नहीं देने पर अड़ी थी। जब बात नहीं बनी

Story – काँच और हीरा

एक राजा का दरबार लगा हुआ था, क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये राजा का दरवार खुले मे लगा हुआ था। पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी। महाराज के सिंहासन के सामने, एक शाही मेज थी और उस पर कुछ कीमती चीजें रखी थीं। पंडित लोग, मंत्री और दीवान आदि सभी दरबार

Story – ईश्वर की लीला

वो बूढ़ी भिखारन आज फिर बीमार है। कल किसी ने बासी पूरियां खाने को दीं तो उसने जिह्वा के आधीन हो, चारों पूरियां गटक लीं। आज सुबह से बार बार पेट की पीड़ा उसे व्याकुल कर दे रही है। काश कहीं से बस दो केले मिल जाते तो उसका पेट और पीड़ा दोनों झट से

Story – मूल्यवान सबक

एक दिन दोपहर को एक दोस्त के साथ सब्जी बाज़ार टहलने गया। अचानक फटे कपड़ों में एक बूढ़ा आदमी हाथ में हरी सब्जियों का थैलियां लेकर हमारे पास आया। उस दिन सब्जियों की बिक्री बहुत कम थी, पत्ते निर्जलित और पीले रंग के लग रहे थे और उनमें छेद हो गए थे जैसे कि कीड़ों

Story – वो डिब्बा

चिलचिलाती ज्येष्ठ की दोपहरी हो या सावन की घनघोर बारिश हो, सरला अपने बेटे आलेख की स्कूल बस के इन्तजार में समय से पहले बस स्टॉप पे आकर खड़ी हो जाती थी। पल्लू से पसीना पोछती या फिर बारिश की बूंदे हटाते हुए वो बार बार सड़क में दूर तक निगाह दौड़ाती रहती। बस स्टॉप

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Story – लक्ष्मी के पग

रात के पौने 8 बजे का समय रहा होगा। एक लड़का एक जूतों की दुकान में आता है, गांव का रहने वाला था, पर तेज़ था। उसका बोलने का लहज़ा गांव वालों की तरह का था, परन्तु बहुत ठहरा हुआ लग रहा था। लगभग 22 वर्ष का रहा होगा । दुकानदार की पहली नज़र उसके

Story – श्रेष्ठ नागरिक

एक फटी धोती और फटी कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी 15–16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी पर बैठा देख एक वेटर ने उनके सामने दो गिलास साफ ठंडे पानी के रख दिए और पूछा — “आपके लिए क्या लाना है?” उस व्यक्ति ने कहा — “मैंने

Story – सबसे अनमोल

अशोक जी अपनी पत्नी के साथ अपनी रिटायर्ड जिंदगी बहुत हँसी खुशी गुजा़र रहे थे। उनके तीनों बेटे अलग अलग शहरों में अपने अपने परिवारों के साथ थे। उन्होनें नियम बना रखा था….दीपावली पर तीनों बेटे सपरिवार उनके पास आते थे…वो एक सप्ताह कैसे मस्ती में बीत जाता था…कुछ पता ही नही चलता था। कैसे

Story – बैटर ऑप्शन

नौकरी संबंधित कार्य से लगभग हर रोज दिल्ली जाना होता है। वापसी पर मुरथल के एक ढाबे पर रात्रिभोज हेतु रुकता हूं। खाने का मेन्यू सेट है — हाफ दाल, 3 रोटी, 1 प्लेट सलाद, 2 कटोरी सफेद मक्खन,……..और आखिर में खीर। लगभग हर रोज एक व्यक्ति मेरी टेबल पर आता है। मैं उसे वही